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"बाबा जी के दृष्टांत "------पंचम

Posted On: 18 Mar, 2016 में

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एक थे पंडित जी ,मौन साधक ,हर सांस में राम -राम चलता रहता था ,ओंठ भी नहीं हिलाते थे ,ताकि उनका नाम जप रूपी धन कोई जान न ले |
पंडिताइन कहीं सत्यनारायण की कथा सुनने गयीं,तो वहां नाम जप की महिमा सुनी,पंडिताइन को बड़ा अफ़सोस हुआ कि पंडित जी तो कभी भगवान का नाम ही नहीं लेते |
पंडिताइन ने संकल्प लिया कि जब पंडित जी भगवान का नाम उच्चारण करेंगे ,तो अपने घर पर सत्यनारायण की कथा करवाएंगी | एक दिन पंडित जी निद्रा में थे ,तो सोते -सोते ही “राम ” का तेज़ उच्चारण किया | सुबह पंडित जी उठे ,देखा ,आज पंडिताइन बहुत पूजा -पाठ करने की तैयारी में लगी हुयी हैं ,पूरा घर ब्रह्म मुहूर्त में उठकर लीप -पोत डाला |
पंडित जी ने कहा ,आज क्या ख़ास है भाई ? बहुत खुश हो तुम |
तब पंडिताइन ने पूरा किस्सा बताया |
पंडित जी ने सत्यनारायण की कथा -वगैरह करवाई ,पर उस रात बहुत सोच में पड़ गए,और प्रभु से बोले -आज तक मैंने आप को कितना छुपा के रखा ,कितने जतन से मैंने अपनी भक्ति दुनिया से छिपाई ,पर आज तो मेरा हीरा ही खो गया ,अब जी कर क्या करना प्रभु ? और दूसरे दिन शरीर छोड़ दिया |
कहने का भाव यह है ” धर्म जितना गुप्त तरीके से करो उतना अधिक फल दाई “.धर्म के नाम पर दिखावा ,ढोंग आदि बिलकुल भी अच्छा नहीं होता |
नोट – मेरा व्यक्तिगत मानना है ,आज महानगरों में ,बड़े शहरों में जो धर्म के नाम पर हो रहा है ,वह बहुत अजीब है ,सात्विक धर्म हो ,पर शोर -शराबा ,शराब -शबाब धर्म के बीच में न आये ,तो ही अच्छा है |

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pkdubey के द्वारा
March 26, 2016

विगत सप्ताह पास के विठ्ठल मंदिर में “काकड़ा हरिपाठ मंडल” के तत्वाधान में एक संत तात्विक चर्चा कर रहे थे ,जिसमे उन्होंने एक दोहा कहा – ओंठ न हिले ,जीभ न चले ,मुख न बोले राम || राम हमारा जप करे ,मैं बैठूं आराम || अतः अध्यात्म विज्ञान बहुत विशद और गहन है,कई जन्म बीत जाते इसे समझने में | इस शरीर का मुख्य उद्देश्य यही है ,आत्मा को जानो| अतः जीवन की आपा -धापी में हम अपने को भी खोजने का समय अवश्य निकाले ,तो ही जन्म सार्थक है | जय श्री राम ||

Ice के द्वारा
July 11, 2016

“The concocted “Iran crisis” is an an example of a country gone mad because it can’t dominate Persia and profit from it#&h8221;W.at garbage. It’s because they kept parts of their nuclear program hidden for TWENTY YEARS and they routinely threaten to wipe out other sovereign states. I’ve come to expect this revisionist garbage from “Don Bacon” who is an infamous Iran apologist.


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