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"महिषासुर की पूजा सबको करनी चाहिए ,पर देवी की ज्यादा "

Posted On: 1 Mar, 2016 में

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दुर्गा सप्तशती वैकृतिक रहस्यम ३० वां अर्धश्लोक -
पूजयेन्महिषं येन प्राप्तम सायुज्यमीशया ||
जब से देश में महिषासुर की चर्चा है ,तब से मेरा ध्यान दुर्गा शप्तशती की इस पंक्ति की ओर था ,पर आज मैंने उसे खोजकर पूर्ण आत्मविश्वास के साथ आप सब के समक्ष रखा |
आशा है ,सुधी पाठक लाभान्वित होंगे |
महिसुर और महिषासुर में अंतर मात्र इतना है ,महिसुर ,पृथ्वी की चरण वन्दना करता है ,महिषासुर पृथ्वी को सींगो से प्रताड़ित करता है |
|| जय माँ भगवती ,आदिशक्ति ,सबको सद्बुद्दि दे ||

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
March 4, 2016

श्री दूबे जी महिसुर और महिषासुर में अंतर मात्र इतना है ,महिसुर ,पृथ्वी की चरण वन्दना करता है कृपया मही सुर का मतलब क्या है समझाएं मुझे शास्त्र का ज्ञान कम है काफी समय बाहर रही हूँ धन्यबाद

pkdubey के द्वारा
March 5, 2016

सादर साधुवाद आदरणीया ,प्रितिक्रिया के लिए | वैसे शाब्दिक अर्थ में -मही का अर्थ -पृथिवी और सुर का अर्थ -देवता | अर्थात जो पृथ्वी पर देव रूप से विचरण कर रहे हैं -देव का अर्थ जो देने की अभिलाषा रखता है ,वैसे लोक चर्चा में महिसुर -ब्राह्मण को समझा जाता है ,पर मेरे विचार से -संत रविदास भी महिसुर अथवा महिसुर से भी बहुत ऊपर उठ चुके व्यक्तित्व थे | कश्यप ऋषि के दो पत्नियां थी -दिति एवं अदिति | दिति से दैत्य हुए और अदिति से देव | दैत्य भी शिव ,शक्ति ,नारायण ,ब्रह्म आदि के उपासक थे ,पर वह समाज का शोषण करना चाहते थे | देवता भी इन सबके उपासक थे -पर वह समाज का पोषण करते थे | जो पृथिवी पर समाज का पोषण करना चाहे वह महिदेव ,महिसुर है और जो समाज का शोषण कर अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहे वह महिषासुर है | आशा है ,मेरा विचार आप को उचित लगेगा | सादर नमन |

Maryland के द्वारा
July 11, 2016

Thanks Lynne. Solo play ideas are noted. That is a great suggestion. That might be more of a mindset module however. I have seen 2 people do the same exact activity and one consider it work and the other play. I’m sure yo&#8u217;ve seen that a millions times as well Lynne.


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