SUBODHA

Just another Jagranjunction Blogs weblog

241 Posts

2221 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 18093 postid : 1137579

"शनि से ही नहीं,बाबाओं से भी दूर रहे नारियां"

Posted On: 9 Feb, 2016 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

अभी तक लगभग ५-६ बार शिर्डी और शनि शिंगणापुर जाना हुआ,बहुत बार वहां का अवलोकन और विचार किया है | अधिकतर तीर्थयात्री शिर्डी जाकर ही शनि धाम जाते हैं,वहां से शेयरिंग बुलेरो मिल जाती है ,वही वापस लेकर शिर्डी छोड़ देती है | जब पहले १-२ बार शनिधाम गया,तो वहां की व्यवस्था अलग थी -वहां एक नहाने के लिए टंकी से पानी आता रहता था,उसके नीचे नहाओ,वहां से ही मात्र एक पीला अधोवस्त्र धारण करो,पूजन सामग्री खरीदो,जिसे बेरी के पेड़ से जाकर स्पर्श करो -(एक कथा है -पास के नाले में बहती हुयी मूर्ती उसी पेड़ के पास आकर रुक गयी थी ,बाद में एक संत को स्वप्न हुआ -जिसमे शनिदेव ने बताया -मुझे उठाने के लिए मामा-भांजे ही हो और जिस बिल्गाड़ी से जाओं ,उसमे बैल भी मां -भांजे हो ,कहते हैं जब शनि रूठता है -तो मामा-भांजे में झगड़ा होता है और शनि की पूजा -यदि मामा -भांजे एक साथ मिलकर करें ,तो अधिक लाभकारी है |)-इसके बाद मौन रहकर मंदिर में जाओ और शनि मूर्ती की बाईं और से जाकर उन पर तेल अभिषेक करो और सामने से नीचे उतर जाओ | नारियां -प्रणाम कर सकती हैं ,मंत्र कह सकती हैं ,पर अभिषेक नहीं कर सकती हैं | ऐसी कथा और सत्य भी है -शनिदेव हमेशा अपने पिता सूर्य देव की छत्रछाया में ही रहते हैं ,शनिधाम में जो नीम का पेड़ है ,वह वैसे तो चबूतरे के पास है ,पर उसकी कोई टहनी उस मूर्ती की ओर वृद्धि नहीं की और उधर की शाख पर पत्त्तियां भी नहीं हैं |
पर जब ४थी -५वीं बार गया (लगभग ३ वर्ष पूर्व ) तब वहां का सिस्टम बदल चुका था -चबूतरे पर दर्शको ,भक्तों का जाना बंद हो चुका था,वहां नहाना और मात्र गेरुआ अधोवस्त्र धारण करना बंद हो चुका था क्यूकि शिर्डी से नहाकर ही वहां जाते हैं ,एक टेक्निकल & इलेक्ट्रिकल सिस्टम बन चुका है ,उसमे आप चबूतरे के ५-६ फ़ीट दूर ट्रे में तेल चढ़ाओ और वह फ़िल्टर होकर ,मोटर से शनि देव के ऊपर भेजा जाता है -इससे दो फायदे हुए १) भीड़ कंट्रोल करने में आसानी हो गयी ,२) कम समय में अधिक लोग दर्शन कर सकते हैं ,बिना भगदड़ की आसंका से | हो सकता है -इस सिस्टम के पीछे गूढ़ कारन यह भी हो कि -जो नारी अनजाने में चबूतरे पर चली जाती हो,वह वहां तक न जाये |
पर अब अचानक आंदोलन चालू हो गया ,जिसमे यह कहा जा रहा है -नारियों को भी चबूतरे पर जाकर अभिषेक करना है |
इस देश की ,विशेषतः इस धर्म की कुछ परिपाटी है ,वह भी अपनी जगह पर उचित है -शायद नारी आज के बाबाओं से भी सावधान और उचित दूरी बनाकर रखे ,तो धर्म और मर्यादा दोनों की सुरक्षा है |
नारी मंत्र जप करे ,नारी सिद्धि दात्री बने ,पर ,भला, मेनका का विश्वामित्र की तपस्या में खलल डालने का क्या औचित्य है |

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

279 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran