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"जातिवाद का जहर,आरक्षण की आग,महिला शक्ति और राजनीती "

Posted On: 26 Aug, 2015 Others में

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गुजरात जल रहा है,जिसे नरेंद्र मोदी ने १२ साल तक सम्हाला उसे अब वर्तमान सरकार सम्हालने में सफल नहीं है ,शायद देश को अनेक नरेंद्र मोदी चाहिए |
सरकारी नौकरियां घट रही हैं,गैर सरकारी का समय है,फिर भी आरक्षण की मांग करने वाले समूह अधिक है,ऐसे में चिंता का विषय यह है इन्हे कैसे सम्हाला जाये | लोकतान्त्रिक देश में हंगामा ,धरना करना जनता का अधिकार है ,पर शायद दंगे करना ,आग लगाना कदापि नहीं |
आज उच्च जातियों के घर के लड़के भी यह सोचते काश मैं निम्न जाती में पैदा हुआ होता ,तो मैं भी ४० % अंक लेकर भी IIT में पढता ,अच्छी नौकरी करता , क्या उच्च जातियां ही आरक्षण के कोटे से अलग रह जाएंगी ?
क्या जातिवाद एक जहर है ? क्या वर्ण भेद एक वकवास है ,यह भी गंभीर मुद्दा है देश और विश्व के सामने ? क्या हरिजन यह चाहता है,यदि ब्राह्मण उसके पैर छू लेगा ,तो वह आसमान पा जाएगा अथवा क्या ब्राह्मण यह चाहता है,हरिजन उसके पैरो के पास पड़ा हुआ गिड़गिड़ाता रहे -यदि ऐसा है तो शायद दोनों ही गलत है | यहाँ पर सबसे अच्छा आदर्श यह हो सकता है – ” नहीं चाहते हम औरों की मुंह की रोटी खाना ,नहीं चाहते हम औरों को अपना दास बनाना” |
मुंबई के मंदिरों में मैंने देखा – यहाँ पर भजन में बैठे हुआ हर एक इंसान एक दूसरे के पैर छूता है, PAR PAIR CHOONAA HEE SABHYTAA KAA CHARMOTKARSH NAHEE HO SAKTAA | जातिवाद का जहर केवल उच्च और निम्न में ही नहीं ,हर एक दूसरे इंसान के बीच में है, कान्यकुब्ज ब्रह्मण ,सरयूपारी को अधिक वैल्यू नहीं देता & VICE VERSA -एक कहावत भी बना दी हमने -वामन ,कुत्ता ,हाथी ; जे ना चाहे साथी . चमार ,मेहतर को अपने से निकृष्ट समझता है |
पर मुझे लगता है -
१.जाती के व्यवसायों के आधार पर उन्हें उनके सेक्टर में आरक्षण दिया जाये | जैसे टीचिंग प्रोफेशन(प्रधानाचार्य से लेकर चपरासी तक ) -६० % ब्राह्मण, आर्म्ड फोर्सेज -६०% ठाकुर , LEATHER ,शू फैक्ट्री – ६० % हरिजन आदि |
२. प्राइवेट सेक्टर को और अधिक सरल किया जाये,जिससे सब अपना-अपना व्यवसाय आराम से फैला सकें और सरकारी नौकरी के लिए अपनी जवानी बेकार न गवाएं |

अभी हाल में दिल्ली की एक लड़की ने फेसबुक पर एक पोस्ट डाली ,जिसका विवरण मैंने और आप सब ने भी न्यूज़ चैनल और समाचार पत्रो में पढ़ा -ABP न्यूज़ चैनल ने उसके माँ- पिता जी से भी बात की ,पिछले वर्ष तीन लड़कियों ने बस में एक लड़के को पीटा था |
हाँ मैं मानता हूँ ,लड़कियों पर सेक्सुअल हरासमेंट अधिक होता है ,पर चीप पॉलिटिक्स के लिए हमें ऐसे कार्य नहीं करने चाहिए ,लड़का और लड़की ,दोनों ही समाज के लिए दो नेत्र के समान हैं |
http://aajtak.intoday.in/story/if-lallu-is-brighter-than-mohan…-1-827989.html



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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
August 26, 2015

श्री दुबे जी बहुत अच्छा लेख जिस आरक्षण को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया गया है वह आज सरकारों के लिए समस्या बन गया हैं अमेरिका कनाडा जाइए दो लोग सबसे ज्यादा हैं पंजाबी और गुजराती उनमें भी सबसे धनवान पटेल हैं मुख्य मंत्री स्वयं पटेल हैं वह अब आरक्षण के लिए निकले हैं

pkdubey के द्वारा
August 26, 2015

sadar sadhuvaad aadarneeyaa. achchha ho aarkshan bilkul khatm kar diyaa jaye athvaa gareebee ke aadhar par diyaa jaye.

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 26, 2015

सामयिक आलेख.प्रवीण जी ,आरक्षण समाप्त होना चाहिए ,आरक्षण से लायक युवक अपनी योग्यता साबित नहीं कर पाते और कुंठा जन्म लेती है .

pkdubey के द्वारा
August 26, 2015

sadar sadhuvaad aadarneeyaa . aap kaa sahity avshy padhta hoon,aaj pratikriyaa dene kee koshish kee par safal nahee ho skaa. yah sab netaa bannaa chahte hain aur neta kisee kaa sagaa nahi hota. sadar naman.

pkdubey के द्वारा
September 3, 2015

यदि किसी की सोच ऐसी है कि हरिजन कमांडर बन जाएगा और ब्राह्मण सिपाही तो वह सिपाही उस कमांडर को हमेशा सलूट करेगा ,तो उसकी सोच गलत है ,देश में मंगल पाण्डेय की कमी नही, ऐसे सिपाही भी सुनने को मिलते हैं ,जो कमांडर को भी बंद कमरों में प्रताड़ित करते हैं | जातिवाद की समस्या का असली समाधान ,सबका विकास ही है ,सब आगे बढे ,सम्मान की चाह रखना भी एक अवगुण है |


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