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"सब के 'मन' की करना असंभव"

Posted On: 5 Aug, 2015 Others,social issues,Hindi Sahitya में

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हम सबको अधिकतर ऐसा अनुभव होता होगा ,सब को खुश कर पाना नामुमकिन है | जिस व्हवहार या बात अथवा विचार से एक खुश अथवा उसका भला होगा ,उसी से दूसरे का नुक्सान या वह असहमत होगा | अतः प्रत्येक जीव अपनी -अपनी प्रवृत्ति के अनुसार सुखी और दुखी रहता है एवं आप किसी के सुख -दुःख के कारन नहीं हो | गोस्वामी जी की एक पंक्ति लिखूं,जब निषाद ने लक्ष्मण से कहा,देखो कल तक महलों में रहने वाले आज भूमि शयन कर रहे हैं ,तब लक्ष्मण ने निषाद को समझाया -
“कोऊ न काउ सुख -दुःख कर दाता | निज कृत करम भोग सब भ्राता ||”
याकूब मेनन की फांसी के विरोध में उठने वाली आवाजों से कई गुना अधिक और ऊंची आवाज़ आदरणीय भगत सिंह के लिए उठी होगी,पर नियति ने सबको अनसुना कर दिया |
पोर्न साइट्स के बंद करने की चाह रखने वाले बहुत अधिक होंगे,पर वह आवाजे मौन हैं और supporter सरकार के कदम पर प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं |
सबको येन -केन -प्रकारेण,साम-दाम-दंड -भेद,by hook or crook सरकारी नौकरी ही चाहिए ,बाद में मुख्यमंत्री का इस्तीफा भी |
जब हम सत्ता में थे तो इतने उदार और सहनशील -भोले थे ,हमें पता ही नहीं चला हमारे मंत्रीगण क्या कर रहे हैं ,और अब हमें दूसरों को घमंडी घोषित करने में कोई ऐतराज नहीं है |

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