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"अंधे पीसे ,कुत्ते खाएं "

Posted On: 21 Jul, 2015 Others,social issues में

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एक देसी कहावत है,अंधे पीसे ,कुत्ते खायेँ | अर्थ,भावार्थ सब स्पष्ट ही है ,पर फिर भी विवेचना के तौर पर कुछ लिखना आवश्यक है | यदि अँधा इंसान, आटा पीसेगा ,तो पता ही नहीं चलेगा ,कितना पिसा और कुत्ते मौका पाकर सब खा जायेंगे | पर मजे की बात यह है,सभ्यता ,खाने और सोने से ही नहीं चलती | माननीय पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी के शब्द,” पय पीकर सब मरते आये ,लो अमर हुआ मैं विष पीकर “. बात यहाँ पर आकर रुकती है,कि किसकी कैसी सभ्यता है ,किसकी कैसी सोच है | यदि मैं कहूँ ,हर एक इंसान का अपना सिद्धांत है ,अपनी सभ्यता है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं | सदाचारी इंसान सत्तासीन होकर विनम्र बन जाता है,चाहे वह जन्म से रंक ही क्यों न हो | दुष्ट प्रवृत्ति का इंसान,हर एक उपलब्धि पर दुनिया के सामने नंगनाच करने लगता है ,जैसे वह सब कुछ निगल ही जाएगा |पर इन सबसे ऊपर है काल,वह समय -समय पर सभ्यताओं को परिष्कृत करने का कार्य करता है | वह बतलाता है ,इस जगत में तुम कुछ भी नहीं हो ,तुम्हारे जैसे कितने आये और चले गए ,पर एक इंच जमीन भी इधर -उधर नहीं हुयी ,क्यूंकि इस धरा का स्वामित्व किसी और के पास है | इसलिए प्यारे जयादा भड़भड़ाओ मत,जियो और जीने दो | अपने को सत्य से कभी दूर मत होने दो ,यदि अलौकिक सत्य के निकट नहीं पहुँच पा रहे ,तो न सही ,पर लौकिक जगत में ,दैनिक व्यवहार में भी सत्य का साथ दो |

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
July 22, 2015

श्री दुबे जी काफी समय बाद आपको ब्लॉग मैं देखा लिखने का भाव बहुत अच्छा हैं लेकिन आज कल प्रतिक्रिया नहीं जा रही है अत : संक्षिप्त मैं अपनी बात खत्म करती हूँ

pkdubey के द्वारा
July 23, 2015

sadar sadhuvaad aadrneeyaa. haan kuchh technical aur family issues the.punah kuchh samay nikal kar likhte rhenge.aage prabhu ichchhaa.


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