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"विवाह एक संस्कार है"(जागरण जंक्शन मंच )

Posted On: 11 Dec, 2014 Others,social issues,Junction Forum में

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शादी पैसों की बर्बादी नहीं ,अपितु एक पवित्र बंधन है | वैसे तो संसार में जन्म लेना भी एक बंधन ही है ,जगत में जो भी हो रहा है सब बंधन कारक ही है,पर इन सब के बीच यदि एक बंधन में और बंधा जाये,तो कुछ बुराई नहीं | और आजकल के समय में तो शादी बहुत जरूरी है | हमारे बाबा जी कहते,लड़का हो या लड़की उचित उम्र में शादी कर दो ,अपनी पारिवारिक जिम्मेदारी संभालेगा,बाल -बच्चे पालेगा | नहीं तो आवारा बन जाएगा और समाज में खड़े होने लायक भी नहीं रखेगा तुम्हे |
पर धन का अपव्यय नहीं करना चाहिए,दोनों परिवार मिलकर नवदम्पत्ति को अपना नया घर बसाने में आर्थिक सहयोग करें,न कि एक ही दिन संचित धन को खर्च कर दें |
किसी भी समाज का निर्माण संस्कार से होता है | यदि हम अच्छे संस्कार देंगे तो अच्छा समाज बनेगा,नहीं तो मनुष्य हर पल विनाश की ओर ही चल रहा है | और जब उसे अपनी गलती का अहसास होता है ,तब तक बहुत देर हो चुकी होती है ,तब शायद वह अपने किये हुए का पश्चाताप भी नहीं कर सकता |अतः आवश्यक यह है हम जीवन का प्रत्येक दिन ,प्रत्येक पल सोच समझकर जियें |
हमारा हर कार्य एक अच्छा संस्कार बनकर हमारी उन्नति का मार्ग प्रसस्त करे और हम कल्याण पथ के पथिक बन सके ताकि हमारा जीवन “आत्मनो मोक्षार्थ,जगत हिताय” हो सके |
इसी सोच के साथ हम धन का अपव्यय रोकें और सुविचारों से विवाह जैसे पवित्र कार्य से अपना गृहस्थ आश्रम धन्य बनाये |
क्यूंकि कलियुगी सतलोक आश्रम से सुगृहस्थ आश्रम ही सर्वश्रेष्ठ है |



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
December 11, 2014

सुगृहस्थाश्रम निश्चय ही जीवन के अनेक रूपों एवं अवस्थाओं से श्रेष्ठ है । आपके विचार स्तुत्य हैं । सरल भाषा में सटीक बात कहने के लिए आपको साधुवाद दुबे जी ।

pkdubey के द्वारा
December 11, 2014

SADAR SADHUVAAD AADRNEEY BHAISAHAB.

Shobha के द्वारा
December 11, 2014

श्री दूबे जी पश्चिम की ऐसी आंधी चली उसमें सब कुछ बदलता जा रहा हे उत्तम विचार डॉ शोभा

pkdubey के द्वारा
December 12, 2014

sadar sadhuvaad aadarneeyaaa.

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
December 14, 2014

दोनों परिवार मिलकर नवदम्पत्ति को अपना नया घर बसाने में आर्थिक सहयोग करें,न कि एक ही दिन संचित धन को खर्च कर दें | ———मै भी आपकी बात से पूर्ण तय सहमत हूँ ,मात्र दिखावे के लिए  अनाप शनाप खर्च करना कोई बुद्धिमानी का काम नहीं है ,उत्तम आलेख .

pkdubey के द्वारा
December 15, 2014

sadar sadhuvaad aadarneeyaa.


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