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"तारा शाहदेव-एक आदर्श नारी"

Posted On: 1 Sep, 2014 Others,social issues में

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बहुत दिनों से देश में इस नाम की चर्चा है और मैंने भी समय मिलने पर कई न्यूज़ चैनल पर इस महान व्यक्तित्व को सुना,जिसके शरीर पर प्रताड़ना के चिन्ह स्पष्ट दृष्टिगोचर होते,किसी प्रकार से वह जान बचाकर वहां से निकली और सारे काले कारनामों का भंडा फोड़ उसने बाहर आकर किया,देश के शासन ,प्रशासन और न्याय का असली चेहरा जनता के सामने आया,मंत्री ,जज,अधिकारी यह देश सेवा नहीं,हराम की खा रहे और भोली,गरीब लड़कियों को अपनी हवस का शिकार बना रहे,इन्हे हर रात्रि एक नयी लड़की चाहिए,इस देश का यह असली चेहरा है और जनता,प्रकृति के प्रकोप से त्रस्त होकर अपना सिर और छाती पीट -पीट कर मातम मना रही है,न कोई उसे सुनने वाला और न ही उसकी परिस्थिति को कोई समझने वाला |
इस देश की ऐसी नारियों को मैं सत्ता में देखना चाहता हूँ,ताकि इनके शक्तिशाली होने से हमारा समाज और अगली पीढ़ी का भविष्य उज्जवल और दैदीप्य होगा |
इसके साथ ही देश में एक और नया शब्द “लव जेहाद” भी चर्चा का विषय है,जो भी देश,जाति अथवा समाज जिसके द्वारा आक्रांत किया जाता है,उसे वह कभी नहीं भूलता,बदला लेने की भावना नियत में ही छुपी होती है और नियति ही सही समय आने पर बदला भी लेती है,घनानंद -चाणक्य,मुग़ल -आर्य,अँगरेज़ -स्वंत्रता संग्राम सेनानी आदि अनेक उदाहरण हमारे इतिहास में हैं और जिन्होंने इतिहास नहीं भी पढ़ा वह भी बदला लेना जानते है,कहते हैं काला सर्प अपनी मृत्यु का बदला अवश्य लेता है,इस देश में अनेक ऐसी वीरांगनाएँ हुयी जिसने अनेक मर्दों को नामर्द कर दिया |
आज का युवा नाम बदलकर नेट पर चैट करता है,एक साथ ३-४ लड़कियों से चैट करता है,अमज़द,अमित बन जाता और रनजीत, रक़ीबुल|
इन्ही विभीषिकाओं से बचने के लिए गीता में ह्रषीकेश ने पार्थ से कहा,”स्वधर्मे निधनं श्रेयः ,पर धर्मो भयावह || अपने ही धर्म और जाति में सही जीवन साथी अवश्य ही मिल जाएगा,यदि थोड़ी सी बुद्धि और लालच से दूर रहकर सोचो,नहीं तो-”विनाश काले विपरीत बुद्धिः” |
हमारे बाबा जी सत्य नारायण कथा के दौरान एक वाक्य कहते -कलियुग में सच्चिदानंद तुरंत फल के दायक है | सतयुग ,त्रेता ,द्वापर में समय लगता था,हज़ारों वर्ष तपस्या करनी पड़ती थी,कलियुग में ५-१० वर्ष में सब क्लियर हो जाता है |
अतः हर पल सोच समझ कर,सही ,गलत का विचार करते हुए जीना बहुत आवश्यक है |



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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

brijeshprasad के द्वारा
September 1, 2014

रणजीत क्यों रक़ीबुल बना ?और इतना रक़ीबुल बना, की इस्लाम के लिए शादी कर पत्नी को इस्लाम स्वीकार कराने लगा। प्रभाव इतना की,तारा ने स्पस्ट कर दिया की लोकल प्रसाशन रणजीत का कुछ भी नहीं कर सकता। देश के प्रसाशनिक व्यवस्था का असली चेहरा तारा के प्रयासों से उजागर हुआ। सराहनीय लेख है, आप का। धन्यवाद।

pkdubey के द्वारा
September 2, 2014

sadar sadhuvaad aadarneey.tara me avshy hee bhut sahas hai,nahee to na jane is desh me kitnee nariyan aise hee pratadit kee jaa rhee hain.

kavita1980 के द्वारा
September 2, 2014

सराहनीय विचार प्रधान लेख दुबे जी -बधाई

pkdubey के द्वारा
September 2, 2014

sadhuvaad aadarneeyaa.

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
September 2, 2014

दुबे जी, इस सामयिक विषय पर लिखने के लिए आभार । यह जो हो रहा है इसका विरोध होना ही चाहिए । इससे मासूम लडकियों का जीवन बर्बाद हो रहा है । मेरा मानना है कि इस सबंध मे माता पिता को भी थोडा अपने बच्चों को समझाना होगा कि वह आधुनिकता के फेर मे न पडें । यह कलयुग का प्रभाव है ।

Shobha के द्वारा
September 2, 2014

दूबे जी वाकई आपने ठीक लिखा है उनकी हिम्मत को दाद देनी होगी उत्तम विचार डॉ शोभा

Santlal Karun के द्वारा
September 2, 2014

आदरणीय दुबे जी, इस छोटे-से आलेख में आप ने हैवानों के चंगुल में फँसकर बर्बाद हुई नारियों की विसंगति पर मार्मिक और अपेक्षित तथ्य को उजागर किया है; हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

Santlal Karun के द्वारा
September 2, 2014

आदरणीय दुबे जी, इस छोटे-से आलेख में आप ने हैवानों के चंगुल में फँसकर बर्बाद हुई नारियों की विसंगति पर मार्मिक और अपेक्षित तथ्य को उजागर किया है; सहृदय साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

pkdubey के द्वारा
September 3, 2014

aap kaa sujhav anukarneey hai aadarneey.sadar sadhuvaad.

pkdubey के द्वारा
September 3, 2014

haan aadarneeyaa.seedhaa aur saty kab tak pareshan kiyaa jata rhegaa,yah chintaa kaa vishay hai.

pkdubey के द्वारा
September 3, 2014

sadar sadhuvaad aadarneey.ek sahity maneeshee prachary kee anumodit pratikriyaa se mujh naye blogger kaa haunsala badegaa.sadar aabhar.

jlsingh के द्वारा
September 5, 2014

अतः हर पल सोच समझ कर,सही ,गलत का विचार करते हुए जीना बहुत आवश्यक है | sookti! is ghatana se seekh lene kee jaroorat hai aur byawastha ko badalane kee bhi jaroorat hai!

pkdubey के द्वारा
September 5, 2014

haan ji sir.samaj ke varishthh aur anubhavee vyakti hee aglee peedhee ko sahee-galat kaa bhed bataa skte hain aur yuvaon aur kishor ko unkee baat bhee mannee chahiye,ek achchhaa aagyakaree bankar.

deepak pande के द्वारा
September 7, 2014

आरा के सहस को शत शत NAMAN

Krishna Kumar के द्वारा
September 7, 2014

दुबेजी आपका लेख सराहनीय है, और मैं तारा शाहदेव जी के अदम्य साहस को भी नमन करता हू| लेकिन ध्यान देने वाली बात ये है कि एक कुशल निशाने बाज का निशाना अपनी निजी जिंदगी मे सही लक्ष्य क्यू नही भेद सका? जहा तक समाचार पत्रों के माध्यम से मुझे पता चला है कि 7 जून 2014 को इनकी पहली मुलाकात हुई थी और अगले महीने विवाह, और उसके अगले महीने विवाह टूट भी गया, ये सारे फ़ैसले इतनी जल्दी मे लिए गये कि तारा जी को टाइम ही नही मिला उस व्यक्ति को परखने का| मैं समझता हू तारा जी का ये फ़ैसला एक बहुत बड़ी भूल थी | और इस घटना के बाद सभी महिला और पुरुष पाठको से मेरा अनुरोध है कि जीवन मे कोई भी बड़ा या क्षोटा फ़ैसला लेने से पहले उसको खूब अच्छे से परख ले..धन्याबाद |

pkdubey के द्वारा
September 8, 2014

haa aadarneey,pyar me sab jaldee hee ho jata ,aur ranjeet urf rkeebul ko taraa se bhee jyada jaldee hogee.


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