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"सुस्वागतम गणेश"

Posted On: 30 Aug, 2014 Others,social issues,Religious में

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भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से अनंत चतुर्दसी तक देश में,विशेषतः महाराष्ट्र में गणेश उत्सव मनाया जाता है,गणेश चौथ के एक -दो दिन पूर्व से ही आम जन मानस और बड़े -बड़े मंडल ढोल-नगाड़े और गाजे -बाजे के साथ भगवान विघ्नराज,सिद्धिविनायक,लम्बोदर,गौरीनंदन की सुशोभित मूर्ती अपने -अपने घरों में और मंडप में लेकर आते हैं,किसी -किसी मंडल का संगीत बहुत ही दिव्य होता है,जैसे कालीना के शिवाजी मंडल का. उनके म्यूजिक से समाज और वातावरण में एक दिव्यता आती है,उसे देखकर और सुनकर मुझे -”लाइट ऑफ़ एसिआ” में वर्णित शुद्धोधन के स्वप्न की व्याख्या याद आती है-जिसमे उन्होंने देखा था -उनका बेटा एक ऊंचे पर्वत पर बैठकर ढोल का भयंकर नाद कर रहा है और एक ऋषि ने जिसकी व्याख्या की थी -तुम्हारा पुत्र एक नए युग का सूत्रपात करेगा,राजन |
आज के समय में धर्म का स्वरुप भी बदल रहा है,कुछ ही इंसान सत्य का अनुभव करने के लिए ईश्वर की शरण में जाते हैं,और अधिकतर धर्म के नाम पर पैसे इकठ्ठे कर के,कुछ पैसे मूर्ती और सजावट में,शेष धन शराब और शबाब में,धर्म का ऐसा पक्ष समाज के लिए बहुत दुखद है,जिससे कुछ व्यक्ति धर्म से दूर ही रहना चाहते हैं,यह भी समाज के लिए हितकर नहीं |
देश के प्रत्येक राज्य और राज्य के प्रत्येक जनपद में भिन्न -भिन्न उत्सव और पर्व का आयोजन होता है ,शायद इसका भी बहुत गूढ़ार्थ है-जन्माअष्टमी को मथुरा और उसके आसपास की प्रक्रति में दिव्यता आ जाती है ,तो रामनवमी को अवध क्षेत्र में,गणेश चतुर्थी को महाराष्ट्र में,दुर्गा पूजा के पर्व पर बंगाल में,ओणम के पर्व पर केरल में आदि -आदि | यदि जन्माष्टमी को काले घने बादल रात्रि में एक धीमी फुहार न बरसायें तो आम जनता इसे शुभ नहीं मानती और शायद ईश्वर भी अपने जन्मदिवस के उपलक्ष्य में,जीव जगत पर विशेष कृपा करता होगा,पर ईश्वर की ओर उन्मुख होने की एक कोशिश तो प्रत्येक जीवधारी को करनी ही होगी |

O DEAR CHILD OF SHIV & SHIVA ,ELEPHANT HEAD LORD !SHOW YOUR JALWAA,JALWAA,JALWAA………………………………………………………….!



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
August 30, 2014

कुछ ही इंसान सत्य का अनुभव करने के लिए ईश्वर की शरण में जाते हैं,और अधिकतर धर्म के नाम पर पैसे इकठ्ठे कर के,कुछ पैसे मूर्ती और सजावट में,शेष धन शराब और शबाब में,धर्म का ऐसा पक्ष समाज के लिए बहुत दुखद है, दुबे जी बहुत सुन्दर और सच लिखा आप ने अब तो किसी पर विश्वास करना ..उसकी सहायता करना उसको दान भिक्षा देना भी मुश्किल है विश्वास नदारद … गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभ कामनाएं भ्रमर ५

Shobha के द्वारा
August 30, 2014

दुबे जी कई वर्ष पहले हम पूरे परिवार समेत मुम्बई गणपति उत्सव में गये थे इतना जीवन मैने कहीं नही देखा जितना गणपति उत्सव में देखा आपका लेख पढ़ा मुझे वह अवसर याद आ गया डॉ शोभा

pkdubey के द्वारा
September 1, 2014

sach kahaa aap ne aadarneey.bhut din baad aap idhar padhare.

pkdubey के द्वारा
September 1, 2014

haan aadarneeyaa.yah utsav manushy me nayee oorja ka sanchar karte hain.par sahee dhang se manaye jayen.


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