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"नारी और तेज़ाब"

Posted On: 27 Aug, 2014 Others,social issues में

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कुछ सप्ताह पूर्व मैंने एक कविता लिखी थी,”कन्या तेरे हाथ में तेज़ाब चाहता हूँ “||| बहुत से जनमानस ने उस को पढ़ा,कुछ शुभचिंतक साथियों और वरिष्ठ बुद्धिजीवियों ने प्रतिक्रिया भी दी |
उस कविता के कुछ दिन बाद मैंने दैनिक जागरण में एक न्यूज़ पढ़ी – मथुरा में एक बुजुर्ग महिला ने,अपने परिवार के तीन सोते हुए युवकों पर तेज़ाब डाल दिया,तीनों युवक बुरी तरह से जख्मी,संपत्ति को लेकर कुछ विवाद के सम्बन्ध में उस महिला ने ऐसा कदम उठाया |
हमारा सिस्टम ही अपराधी तैयार करता है,ऐसा मुझे और आप सब लोगों को भी कई बार अनुभव होता होगा,कुछ लोग विनय की भाषा को इंसान की कमजोरी समझ लेते हैं और यदि विनम्र व्यक्ति आक्रोशित हुआ तो विनाश लीला दिखाता है और यदि सामने कुछ न भी कह पाया या कर पाया,तो दस जगह तुम्हारे कारनामों की कड़वी व्याख्या करेगा |
प्रत्येक कहानी सत्य और अनेक कहानी के अनुसार,कई अन्य घटनाएँ घटती हैं,भले ही पात्र काल्पनिक हों,पर कहानी में वर्णित हर घटना अक्सर सत्य ही होती है |तो यह कहानी है या सत्य घटना इसका निर्धारण रीडर्स ही करें तो ही अधिक श्रेयस्कर होगा -
एक स्त्री शादी के कुछ वर्ष बाद विधवा हो गयी,उसके एक २ वर्षीय बेटी भी थी,घर में उसके ज्येष्ठ (पति के बड़े भाई),जिन्होंने उसके प्रति सहानुभूति दिखाते हुए सम्मान के साथ अपने घर में ही रखा,सारी खेती खुद ही करते,अपनी अनुजवधू को भी जीवन यापन के लिए कुछ देते रहते | समय आगे बढ़ा-अनुज बधू ने सोचा मेरे साथ अन्याय हो रहा है,मुझे अधिक हिस्सा मिलना चाहिए,आखिरकार मेरे आगे भी एक बेटी है | उसने समाज के कुछ व्यक्तियों को एकत्रित कर के अपने हिस्से का घर और खेत ले लिया,और खेत किसी दूसरे को करने के लिए दे देती,जो उसे ईमानदारी से फसल,पैसे वगैरह दे देता | उस स्त्री ने अपनी बेटी को पढ़ा लिखा कर,खेती से धन इकठ्ठा कर के योग्य वर खोजकर उसकी शादी कर दी | ज्येष्ठ के चार पुत्र,उनके मरणोपरांत उन लड़कों ने अपनी चाची को प्रताड़ित करना चालू किया,अपने चाचा की जमीन और घर पर एकाधिकार करने के लिए | रात्रि में उसके आँगन में कूदकर उसे जान से मारने की धमकी देने लगे,यदि उसने जमीन उनके नाम न की तो | वह संभ्रांत,सुशील,नेक महिला अर्धविक्षिप्प्त हो गयी,रात्रि में वह डर कर घर के बाहर बैठने लगी,दिन में नग्न होकर गांव की गलियों में घूमने लगी | गांव के कुछ हमदर्दों ने महिला की बेटी के पास पत्र वगैरह लिखकर उसे बुलाया | दामाद आकर अपनी सास को ले गया,इलाज करवाया,पर उस महिला ने अपने हिस्से की हर चीज गांव के दूसरे सदस्य को बेंच दी |
और कुछ समय बाद प्रताड़ित करने वाले के घर में भी आत्महत्याएं और अकाल मृत्यु होने लगीं |
जब इतनी वीभत्स परिस्थिति हो,तब तेज़ाब ही एकमात्र सुगम उपाय हो सकता है,कानून को निर्णय करने में बहुत देर हो जाती है,तब तक तो अनेक जिंदगी नरक बन चुकी होती हैं | अतः काल भी नारी के वीर रूप का दर्शन करना चाहता है,ऐसा मेरा विचार है |



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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
August 27, 2014

दुबेजी सत्य के पास लेख समाज का यही हाल है डॉ शोभा

pkdubey के द्वारा
August 28, 2014

sadar sadhuvaad aadarneeyaaa.

sadguruji के द्वारा
August 28, 2014

आदरणीय दुबे जी ! सुप्रभात ! मैं आपकी इस बात से बिलकुल भी सहमत नहीं हूँ कि संकट के समय महिलाओं को तेजाब फेंकने की इजाजत दी जाये ! तेजाब आम आदमी को सुलभ न हो सके,सरकार को इसकी व्यवस्था करनी चाहिए ! बहुत अफ़सोस की बात है कि आप बुद्धिजीवी होकर ऐसा बेतुका और अव्यवहारिक सुझाव दे रहे हैं ! कानून कभी भी इस बात की इजाजत नहीं देगा और मृत्यु होने पर तेजाब फेंकने वाले को भी वही सजा होगी जो खून करने वालों को होती है ! मुझे उम्मीद है कि आप भावना में बहकर ऐसे अराजकता फ़ैलाने वाले और कानून की दृष्टि में दंडनीय सुझाव न देने पर विचार करेंगे !

pkdubey के द्वारा
August 28, 2014

aadarneey main aap se shmat hoon,par kanoon kuchh nahee karta hai aur tab tak anek jindagee ghut-ghut kar mar jatee hain,pratikaar aur aatmraksha karnaa prtyek jeev kaa swabhavik karm hai,kitnon ko kanoon ne sahee rastaa par layaa,yah kahna bhut kathin hai.jo aurat nagn,pagal hokar gaonv me ghomtee rhee uske oopar kya beetee hogee.main to khta kash uske pas bhee tejab hota.

pkdubey के द्वारा
August 28, 2014

aadarneey hamaaree samajh se ,”shathhe shathhyam samacharet ” kaa bhavarth bhee kuchh aisaa hee hogaa.

sadguruji के द्वारा
August 28, 2014

आदरणीय दुबे जी ! आपका कमेंट मैं जागरण के मुख्य पृष्ठ पर देखकर दुबारा जबाब दे रहा हूँ ! आप ये बताइये कि तेजाब फेंकमे वाले को क्या कानून माफ़ कर देगा ? लोंगो को आप गलत सलाह क्यों दे रहे हैं ? सुप्रीम कोर्ट के अभी हाल ही में दिए गए एक फैसले के अनुसार शोसल मिडिया पर गलत विचार व्यक्त करने पर किसी भी व्यक्ति को दण्डित किया जा सकता है,यदि वे विचार देश के कानून के विरुद्ध हैं ! यदि आप खुद अपराधियों को सजा देंगे तो कानून पुलिस और अदालत किसलिए है ? यदि आपकी सलाह मानकर या आपका लेख पढ़कर कोई ऐसा करता है तो आपको भी सजा हो सकती है ! आगे इस विषय पर मैं कोई चर्चा नहीं करूँगा ! आपकी जैसी इच्छा हो वैसा करें !

pkdubey के द्वारा
August 28, 2014

aadarneey sajaa apradhee ko kahan,seedhe insaan ko hee hotee hai.

pkdubey के द्वारा
August 28, 2014

aadarneey kya supreme court dwara gathhit verma samiti ke kanoon ke baad,nariyon par atyachar kam huye,us kanoon me bhut naye niyam aaye-ladkiyon ko ghooro mat,unka peechha mat karo aadi ,kyaa yah sab hona band huaa,main itnaa hee kah rha hoon,naree ko kathhin paristhiti me aatmraksha kaa upay khojnaa chahiye.abhee merathh me ek mahilaa ne manchalon ko peetaa,baad me sarkaar ne puruskaar diyaa,us mahilaa ne kahaa -puruskaar nahee vhahiye,yadi un gundon ke paas hatiyaar vagairah hote to doosree news bhee ban saktee thee. aur daminee(nirbhaya) case ke baad -nirbheek naam kee ek pistol bhee banayee gayee,kanpur gun factory ke dwara jo lady ke purse me aa sktee hai. ek din loksabhaa tv par maine dekhaa-jis par -panini kanyaa mahaa viddhyalay kaa prasar aa rhaa thaa,usme ladkiyon ko bachpan se hee aatmraksha aur ved kee shiksha dee jatee hai,talwaar vazee,judo-karate aadi.abhee ranee mukharjee kee ek movie bhee aa rhee mardanee,uskaa bhee theme kuchh aisaa hee hoga.naree ke shakti roop ko samay dekhna chahtaa hai.jiske vagair unkkaa shoshan aur un par apradh kam nahee ho skte.

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
August 28, 2014

दुबे जी क्ष्मा चाहूंगा इस तर्क से सहमत नही हुआ जा सकता क्योंकि इस कदम से तो तेजाब डालने  वाला स्वयं कानून के कटघरे मे खडा हो जायेगा । उसे फिर कानून की सजा भी भुगतनी पडेगी । यह समस्या का कैसा हल 77

pkdubey के द्वारा
August 30, 2014

main bhee apne sathiyon se hal jannaa chahta hoon aadarneey.dinodin aisee ghatnayen badh rhee hain. kal ,hariyanaa ke jeend me ek chhaatra ka apharan ,maa ,bhai ko kuchl diyaa,maa mar gayee,bhai aspataal me. desh kaa kaanoon aur kaanoon ke rakshak kahaan hain.

pkdubey के द्वारा
August 30, 2014

कई ऐसे इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट्स बनाये जाये,हैंड gloves    और wrist स्ट्राप जो nariyan अपने हाथ में पहन सके और घटना के दौरान वह एक्टिवेट हो और उससे हाई वोल्टेज करंट निकले जिससे आक्रमणkaree दूर भागे ,पर नारी को कोई नुकसान न हो उससे .

jlsingh के द्वारा
August 31, 2014

चाहे जो हो आदरणीय दुबे जी, आप अपने तर्क पर सही हैं. हम अच्छे लोग, आम आदमी हमेशा भीरू होता है, कानून से डरता है, खुद से डरता है, समाज से डरता है, गुंडों से डरता है गुंडे के पास भी दो हाथ पैर ही होते हैं पर वे डरते नहीं है. नेता और उच्च पदस्थ लोग भी न कानून से डरते हैं, न भगवान से …किसी न किसी को आगे तो आना ही होगा. भले उसका अंजाम जो भी हो …भगत सिंह आदि बलिदानी अगर कानून की सोचते तो क्रांति नहीं आती…महिलाओं को अपने आप की रक्षा खुद ही करनी होगी. तारा शूटर कानूनी लड़ाई लड़ रही है …हो सकता है मीडिया और पब्लिक के दबाव में अभी रक़ीबुल उर्फ़ रणजीत जेल में है… पर जैसे मामला ठंढा होगा उसे बेल मिल जाएगी … सजा ही नहीं मिलती है अपराधियों को … इसी लिए अपराध बढ़ते जाते हैं. पुराने लोग कहते हैं इससे तो ब्रिटिश राज अच्छा था क्योंकि उस समय सजा मिलती थी. लोगों में खौफ था. आज खाप पंचायतों का खौप है….बातें बहुत है…आपने सही ही लिखा है. किसी न किसी को आगे तो आना ही होगा…

pkdubey के द्वारा
September 1, 2014

aap ne mamale kee gambheertaa ko samjha aadarneey aur apnee pratikriyaa me samaj kaa sach likha. koi seedha hai iska matlab yah nahee vah shoshit kiyaa jayegaa,aisaa koi din nahee jataa aajkal jab rape,apharan vybhichar kee news naa aatee ho.prtikaar avshy karnaa padegaa.desh ke dharmguruon ko avshy hee iske khilaf aawaaz uthhane kee jaroorat hai,sab maun kyun hain is mudde par?


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