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"कन्या तेरे हाथ में मैं तेज़ाब चाहता हूँ|||"

Posted On: 28 Jul, 2014 Others,social issues,Junction Forum में

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कन्या तेरे हाथ में, मैं तेज़ाब चाहता हूँ ||
चूड़ी वाले हाथों में, अब तलवार चाहता हूँ ||
कुदृष्टि भरी निगाह पर, अब तेज़ाब की बौछारकर ||
ओछे मनचलों पर अब ,तलवार का तू वार कर||
कन्या तेरे हाथ में, मैं तेज़ाब चाहता हूँ ||
चूड़ी वाले हाथों में, अब तलवार चाहता हूँ ||
दुर्दांत पापियों का अब, अंत चाहता हूँ ||
दिखला दे जग को तू भारत की रणचंडी है||
सावित्री,सीता,गीता तू,और तू ही तो शिखंडी है ||
तेरी लाज हरण करने वाले के , मैं शत खंड चाहता हूँ ||
कन्या तेरे हाथ में, मैं तेज़ाब चाहता हूँ ||
चूड़ी वाले हाथों में, अब तलवार चाहता हूँ ||
इस भयंकर कलिकाल में, जब हर तरफ हाहाकार है ||
बस तू ही इस श्रष्टि की, एक मात्र तारणहार है ||
जब हर रिश्ते में एक छल हो,साथी बलात्कारी है||
याद कर तू सत्य को,नारी नर से भारी है ||
तू सृष्टिकारक ,सृष्टिपालक ,सृष्टि की संहारक है||
तू प्रचंड हो गयी तो,श्रष्टि की उद्धारक है ||
तू ध्रुव,प्रहलाद की जननी,भगत, आज़ाद तेरे पूत हैं ||
सुभाष,राजगुरु,बिस्मिल,अशफ़ाक़ जैसे तेरे सपूत हैं ||
कन्या,मैं तेरे यौवन से इनका पुनर्जन्म चाहता हूँ ||
चूड़ी वाले हाथों में, अब तलवार चाहता हूँ ||
कन्या तेरे हाथ में, मैं तेज़ाब चाहता हूँ ||



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19 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
July 28, 2014

तू ध्रुव,प्रहलाद की जननी,भगत, आज़ाद तेरे पूत हैं || सुभाष,राजगुरु,बिस्मिल,अशफ़ाक़ जैसे तेरे सपूत हैं || कन्या,मैं तेरे यौवन से इनका पुनर्जन्म चाहता हूँ || चूड़ी वाले हाथों में, अब तलवार चाहता हूँ || कन्या तेरे हाथों में मै तेजाब चाहता हूँ | आपकी सोच को नमन प्रवीण जी ,बहुत सशक्त कविता ,हार्दिक बधाई .

Shobha के द्वारा
July 29, 2014

दूबेजी आपने बड़ी खूबसूरत जोशीली कविता लिखी है वह शुभ दिन अवश्य आएगा जब नारी अपने को पहचानेगी आप बहूत भावुक हैं आपके दिल का दर्द कविता में कूट -कूट कर भरा है डॉ शोभा

pkdubey के द्वारा
July 30, 2014

sadar sadhuvaad aadarneeyaa.sadar naman.

pkdubey के द्वारा
July 30, 2014

sadar sadhuvaad aadarneeyaa.jab tak naree atyachar sahtee rhegee,tab tak yah sab hota rhegaa.jab 10-20 case naree bhee kar degee.to papee darne lagegaa.sadar naman,aap ne meree gahrai ko samajha.

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
July 30, 2014

 दुबे जी , हालातों को देखते जोश और क्रोध का आना स्वाभाविक ही है । समाज बदल रहा है यह हालात भी बदलेंगे ।

ब्लॉग बुलेटिन की आज बुधवार ३० जुलाई २०१४ की बुलेटिन — बेटियाँ बोझ नहीं हैं– ब्लॉग बुलेटिन — में आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है … एक निवेदन— यदि आप फेसबुक पर हैं तो कृपया ब्लॉग बुलेटिन ग्रुप से जुड़कर अपनी पोस्ट की जानकारी सबके साथ साझा करें. सादर आभार!

Asha Joglekar के द्वारा
July 31, 2014

सही लिखा है। चूडी नही अब तलवार चाहिये हाथ में। हर लडकी को मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण लेना चाहिये।

pkdubey के द्वारा
July 31, 2014

sadar sadhuvaad aadarneey.pratikaar karna aur jaise ko taisa dena bhut aavshyak hai.aaj bhut vikraak paristhit hai.chhotee-chotee bachchiyon kaa rape,n jane is par desh ke taranhaar maun kyun hain.

pkdubey के द्वारा
July 31, 2014

sadar sadhuvaad aur kratgy hoon main aap kaa.facebook par main regular nahee rh pata,kuchh dino me check kar update karne kaa prayas karoongaa.

pkdubey के द्वारा
July 31, 2014

sadar sadhuvaad aadarneeyaaa.aaj tak keval ladkiyon par hee acid attack huaa is desh me,jab ladkon par bhee acid attack kee khabren aayengee,usee din se log badalne lagenge.

pkdubey के द्वारा
July 31, 2014

dhanyvaad bhaisahab.

Jyoti के द्वारा
July 31, 2014

आज की कन्या की जरूरते पेश कराती बेहतरीन कविता .

pkdubey के द्वारा
July 31, 2014

SADHUVAAD AADARNEEYAAA.

jlsingh के द्वारा
August 1, 2014

आज की जरूरत के अनुसार लिखे गयी जोशीली कविता के लिए आपका अभिनंदन! बिना तेजाब तलवार के इनका कष्ट दूर नहीं होनेवाला है.

pkdubey के द्वारा
August 1, 2014

sadar sadhuvaad aadarneey.

yamunapathak के द्वारा
August 3, 2014

दुबे जी बहुत ही सुन्दर कविता है …..

pkdubey के द्वारा
August 5, 2014

sadar sadhuvaad aadarneeyaa.


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