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बाबा जी के दृष्टान्त ………चतुर्थ.

Posted On: 12 Jul, 2014 Others,social issues,Special Days में

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आज गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर अपने हृदय और मनोमस्तिष्क के सबसे निकटतम व्यक्तित्व,मेरा बचपन का प्रथम और जीवन का अंतिम यार-बाबा को याद करते हुए,उन्ही का एक दृष्टांत लिख रहा हूँ |
वाद -विवाद हर घर ,घर -घर की बात है |संपत्ति को लेकर झगडे अम्बानी brothers में भी हो जाते हैं | पर उससे कैसे निपटा जाये,यह हर इंसान का व्यक्तिगत निर्णय और उसकी अपनी सूझ -बूझ पर निर्भर करता है | जब मेरे बचपन का दौर था,तभी घर में बटवारे का भी कार्यक्रम पूर्ण पराकाष्ठा पर था | जो भी बात होती,वह मेरे मन पर अमिट हो गयी ,मैं चाहकर भी भुला नहीं पाता |
उस दौर में बाबा जी ने एक सत्य घटना सुनायी थी ,जो उन्होंने फैज़ाबाद में अपनी किशोरावस्था में देखी थी |
एक सेठ जी थे,उनके एक छोटा भाई और २ बेटे | उनके पिता जी का बचपन में स्वर्गवास हो गया | उन्होंने बड़ी कठिनता से जीवन जिया | अपने छोटे भाई को भी बच्चों की तरह ही पाला | अपने व्यवसाय को भी आगे बढ़ाया और एक सोने की ईंट खरीदी | व्यवसाय आगे बढ़ा | परिवार भी फला-फूला | छोटे भाई ने अलग होने का विचार किया | उसने कहा,सोने की ईंट मुझे चाहिए | सेठ के लड़कों ने ,अपने चाचा को ईंट देने से मना किया | बात ज्यादा बढ़ी ,झगडे की नौबत आ गयी | सेठ अपने दोनों बेटो को अंदर कमरे में ले गया और उनसे कहा,” देखो मुझे तो बुढ़ापा है ही,अब आगे सब कुछ तुम्ही लोगों को ही करना है,अपने भाई को भी मैंने तुम्हीं लोगों जितना ही प्यार दिया,पाला -पोसा | कोई बात नहीं, सोने की ईंट उन्हें ही दे दो | तुम लोग सही से आगे बढ़ोगे,तो एक नहीं किसी दिन दो सोने की ईंट होगीं,तुम्हारे पास | नहीं तो चाचा अस्पताल में , तुम लोग जेल में और मेरा बुढ़ापा रोने में गुजर जाएगा | मेरे पूरे जीवन भर के किये धरे पर पानी फिर जाएगा” |
बच्चों को बात समझ में आ गयी और सहर्ष बटवारा हो गया |
इसलिए,”झगड़ा कबहूँ न कीजिये ,झगड़ा से घर जात”,लड़ाई -झगड़ा सभी से ही खराब होता है,पर भाई से तो सबसे अधिक ,क्यों की वह, तुम्हारी हर एक ताकत और कमजोरी को भली -भांति जानता है |



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

anilkumar के द्वारा
July 12, 2014

प्रिय दुबे जी , गुरू तत्व तो समस्त जगत में व्याप्त है , यह हम पर निर्भर है , कि हम उसको कहां से और कैसे ग्रहण करें । आप भाग्यशाली हैं कि आपके बुजुर्गों के अत्यन्त व्यवहारिक और नैतिक उपदेश आज भी आपकी स्मृतियों में जीवन्त हैं और आपका मार्गदर्शन कर रहे हैं । इन बहुमूल्य दृष्टान्तों को हम सबके साथ साझा करने के लिये आभार । गुरू पूर्णीमां के पावन पर्व की बहुत बहुत बधाई ।

bhagwandassmendiratta के द्वारा
July 12, 2014

आम जीवन से जुड़े शिक्षाप्रद दृष्टांत समाज के लिए प्राण वायु का काम करते हैं| नये व अलग विचार मान को छू जाते हैं|

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
July 13, 2014

बाबाजी का व्यक्तित्व बहुत महान होगा क्यों की उनकी सोच महान थी और सबसे बड़ी बात ये कि बच्चों में उन्होंने अच्छी शिक्षा के बीज रोपण किये,ब्लॉग पर आपके अनुभवों का अभिनन्दन है चि.प्रवीण जी .

pkdubey के द्वारा
July 14, 2014

sadar sadhuvaad aadarneey anil ji ,sadar pranam.bhut achchhee seekh dee aap ne ,apne comment me.

pkdubey के द्वारा
July 14, 2014

sadar sadhuvaad aadarneey.

pkdubey के द्वारा
July 14, 2014

aap ko naman karte huye ,sadar sadhuvaad aadarneeyaaa.


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