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"MAN POWER"....................SERIES

Posted On: 11 Jul, 2014 Others,social issues में

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आज ११ जुलाई विश्व जनसख्या दिवस है.पहले भी मैं एक ब्लॉग “man power” के शीर्षक से लिख चूका हूँ,आज कुछ और उसमे ऐड किया जाये,इसीलिये आगे उसी शीर्षक से लिखता हूँ.
हमारा वाराणसी का मित्र पुनीत कुमार सिंह,एक बार अपने परिवार के साथ निजी वाहन से कहीं तीर्थयात्रा पर जा रहा था,रास्ते में उसकी गाड़ी एक सड़क पर गड्ढे में धंस गयी,उसने कोशिश की पर नहीं निकली,तब तक वही आसपास से ४-५ मज़दूर आ गए,उन्होंने गाड़ी को पीछे से उठाकर,आगे धकेल दिया.गाड़ी बाहर ,समस्या खत्म.
इसलिए मेरा विचार है,जनसँख्या समस्या नहीं,समाधान है.मानव संसाधन है.उसके नियंत्रण के बिना कुछ नहीं हो सकता.रोबोट और autopilot machines भी कहीं न कहीं मनुष्य ही नियंत्रित करता है.विष्फोट बनाने का काम वैज्ञानिक करता है,विष्फोटक बम गिराने काम नेता करता और करवाता है,अमेरिका का कारनामा , हिरोशिमा और नागाशाकी पर सब जानते हैं.
हाँ,प्रकृति में नियंत्रण सबका आवश्यक है,सभी का संतुलन भी आवश्यक है.प्रकृति की गोद में वन्य जीव भी पलें-बढ़ें यह भी अतिआवश्यक है.
इस अनियंत्रित जनबल को कार्य मिले,यह बहुत आवश्यक है और ऐसा कार्य मिले जिससे उद्पादन क्षमता बढे;राष्ट्र ,उत्थान के नए उदाहरण विश्व के सामने स्थापित करे.
मनरेगा को कृषि के साथ जोड़ना यह एक अच्छी पहल हो सकती है.हर एक राष्ट्र की अपनी विशेषता और कमियां होती है.हमारे यहाँ मशीन्स कम हैं,पर मानव अधिक.
यदि जवान के बच्चे के लिए आर्मी स्कूल हो सकता है,तो मज़दूर और किसान के बच्चे के लिए भी “लेबर स्कूल” और “फार्मर स्कूल” खोले जाएँ.जिसमे निशुल्क और सर्वोत्तम शिक्षा दी जाये.इस देश का हर एक किसान और मज़दूर कोहिनूर हीरे से भी करोडो गुना अधिक कीमती है.
इस सरकार की दिशा यह बताती है,कि परिवर्तन के प्रयास किये जा रहे हैं . ईश्वर और नियति की कृपा से हम सफल भी होंगे.
यह एक राष्ट्र जिसकी जनसँख्या विश्व के २१-२२ राष्ट्र की जनसँख्या से भी अधिक है,विकसित तो क्या “supreme power” बनेगा. “दुनिया के दादा” समझे जाने वाले राष्ट्र भी इस “बाबा” के सामने अपने किरीट सहित नतमस्तक होंगे.
“जय हिन्द ,जय भारत”.



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
July 11, 2014

बहुत अच्छा लेख ! हमें जनसंख्या विस्फोट से परेशान अपने पडोसी देश चीन से शिक्षा लेनी चाहिए ,जिसने अपने श्रमिकों की शक्ति के बल पर दुनिया भर के बाजारों पर अपना दबदबा कायम कर लिया है ! इस उपयोगी लेख के लिए बहुत बहुत बधाई 1

Shobha के द्वारा
July 11, 2014

यहाँ दूबेजी मैं आपसे बिलकूल सहमत नहीं हूँ जनसंख्या बढाना मुश्किल नहीं है मुश्किल है उसका पोषण करना न जमीन बढ़ रही है न पानी न खेती कमजोर सूखी भूखी जनता का क्या करेगे अब तो जनसंख्या का विस्फोट होने की नौबत है यदि जनसंख्या नहीं रोकी गई लोग आभाव में खुद मरने लगेंगे शोभा

pkdubey के द्वारा
July 11, 2014

sadar sadhuvaad aadarneey.

pkdubey के द्वारा
July 11, 2014

aadaarneeyaa,asahmati bhee main saharsh sweekar karta hoon.maine aisa kaheen padha,jab desh ke adhiktar log ,sanyasee banne kee or agrasar the,tab khajuraho me tatkaleen raja ne mandir banvaye. ab jansankhya adhik hai,to yogguru bhee hain ,is desh me. na jane kitna anaj sad rha hai ,aur pichhle kayee varshon me sad gaya.janbal kaa upyog ,vikas me ho,kisan-mazdoor ke bachche ko achchhee shiksa mile,to aglee peedhee swatah kam santanopatti chahegee.aajkal khet me kaam karne ko mazdoor nahee mil rhe,khetee koi karna nahee chahta.jis desh kee 70 % aabaadee krashi par nirbhar ho ,us desh me gaonvo se palayan,ek bhut gambheer baat hai.aajkal hamen anaz nahee,mobile,laptop,gadee,party,drink chahiye.main jansankhya badhane kee nahee,uska sadpyog aur utthan kee baat kar rha hoon,aadarneeyaa.sadar aabhar ke sath.


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