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"हिन्दी"

Posted On: 30 Jun, 2014 Others,social issues,Hindi Sahitya में

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मातृभाषा वही है जो माँ के द्वारा बोली जाती है,जिसे बच्चा टूटे -फूटे शब्दों में,तोतली बोली में सबसे पहले बोलता है.हिन्दी की आठ उप भाषाएँ भी हैं,यह मैंने १२ की कक्षा में जाना.क्योंकि यह परीक्षा का प्रश्न भी हो सकता है,मैंने एक कोड वर्ड बनाया(ख्ब्र अब छह बुक- खड़ी बोली ,ब्रज भाषा,अवधी,ब-(यह मुझे इस वक्त याद नहीं),छत्तीसगढ़ी ,हरियाणवी,बुंदेलखंडी,कन्नौजी).उस वक्त कल्याण सिंह की सरकार थी.नक़ल करने वाले बहुत जल्दी बुक किये जाते थे.
एक कहावत भी है अपने यहाँ – “कोस -कोस पर बदले पानी ,चार कोस पर वाणी “.वाणी और पानी की विविधता बहुत है ,अपने देश में. लोक गीतों से यह बहुत सुन्दरतम तरीके से जाना जा सकता है. हिन्दी के शब्द लगभग हर राज्य की भाषा में भी पाये जाते हैं अथवा संस्कृत से ही सारी भाषाएँ निकली ऐसा भी ज्ञातव्य है.तमिल और संस्कृत पर भी इस देश में बहस होती रही है,कौन अधिक प्राचीन भाषा है.
परन्तु यदि कोई तमिलभाषी दिल्ली में जाता है,तो हिन्दी में ही बोलने का प्रयत्न करता है,भले ही वह,पुरुष और स्त्री वाचक शब्दों के अंत में सही क्रिया का प्रयोग न कर सके,जैसे-लड़की पढता है,मैं खाना खाती है.
ऐसा सुनकर के किसी का मनोरंजन भी हो सकता है ,पर लोग बोलते हैं. दक्षिण भारत,पूर्व भारत अथवा पश्छिमी भारत का प्रत्येक नागरिक “well qualified english speaking person ” नहीं है. पर तकनीकी विकास के लिए इंग्लिश भी आवश्यक है.आज के इस ग्लोबल परिवेस में आप को सब कुछ जानना अनिवार्य है,शायद जापानी ,चायनीज और रुस्सियन भाषा भी.
राजनीतिज्ञों को चाहिए,वे केवल वोट बटोरने के लिए हंगामा न करें,सत्य और ईमानदारी से जनता के लिए कार्य करें,नहीं तो ऐसा समय आएगा ,जब ऐसे लोग इतिहास के पन्नो में भी खोजने से नहीं मिलेंगे.आप समझ सकते हैं ,जब हर हाथ में ऐसा मोबाइल होगा ,जिस पर हर पल देश दुनिया की खबर आएगी,कौन क्या कह रहा ,यह जनता तत्क्षण जानेगी.नेता की हर एक साँस और हर एक गतिविधि को जनता गिनेगी.
क्योंकि यह लोकतंत्र है ,प्रजातंत्र है ,गणतंत्र है.



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
June 30, 2014

दूबे जी आपने बहुत अच्छा लेख लिखा है परन्तु जब तक हमारी अपनी टेक्नोलॉजी नहीं हो जाती साइंस मे हम इंग्लिश पढ़ने के लिए मजबूर हैं शोभा

pkdubey के द्वारा
June 30, 2014

aap se poortaya sahmat.sadar sadhuvaad aadarneeyaaa.

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 30, 2014

ज्ञान ब्रद्धि और तकनीकी विकास के लिए जितनी भी भाषाएँ सीख लें अच्छा है,पर मात्र भाषा हिंदी को  विशिष्ट सम्मान मिलना चाहिए ,आपकी बात सही है कि ’क्योंकि यह लोकतंत्र है ,प्रजातंत्र है ,गणतंत्र है.’उत्तम आलेख .

pkdubey के द्वारा
July 1, 2014

haan jee aadarneeyaa.bhut -bhut sadhuvaad.


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