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"ऋषिकाल और कलिकाल"

Posted On: 30 May, 2014 Others,social issues में

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भारत भूमि पर एक समय ऐसा भी रहा ,जब विमाता के कहने पर ज्येष्ठ पुत्र राम ने राज्य त्याग कर वनवास अपनाया और कहा हर प्रकार से वनवास हमारे लिए अच्छा है -ऋषि -मुनियों से मिलन ,प्राकृतिक वातावरण आदि -आदि , घर वापस आकर सर्वप्रथम उसी माता के भवन में गए ,जिसने वनवास दिलवाया. और भी पराकाष्ठा का विषय यह रहा -कि भरत ने नंदीग्राम में रहकर ही तपस्या को भी तपा दिया. संजीवनी समेत उड़ते हनुमान को भी नीचे उतार लाये और कहा – !! चढ़ मम शायक शैल समेता,पठवहुँ तोहि जँह कृपानिकेता !! हनुमान जी ने कहा नहीं भरत भाई -आप कष्ट मत करो ,मैं चला जाऊंगा .और मन ही मन भरत की राम के प्रति निष्ठा को सराहते हुए चले गए.राम वनवास काल में बहुत से ऋषि -मुनियों से मिले, वनवास से वापस आते वक्त भी उनसे मिले,रावण-कुम्भकरण के तेज को अपने बदन में समाकर और उनकी बुराई को लंका में ही जलाकर -ख़त्म कर के वापस आकर राजसिंघासनासीन हुए.
इसके बाद एक समय ऐसा भी आया -जब पाण्डु पुत्रों का मूल्यांकन ,जन्मांध ध्रतराष्ट्र,उनकी उच्छृंखल संतान और उनके शकुनी जैसे सम्बन्धी करने लगे.परिणाम सबने जाना -वनवास ,अज्ञातवास ,महाभारत. कुछ भी हो पर- अंत में “सत्यमेव जयते”.
पूरी महाभारत होने के बाद में महाराज युधिष्ठिर अत्यंत दुखी हो गए,तब भगवान ने दिव्य दृष्टि से दिखलाया -देखो दूसरे लोक में सब जीवित हैं ,केवल यह शरीर ही छूटा है.
और बताया -दुर्योधन ,कलिकाल का अवतार था आदि -आदि, अन्य सब के बारे में भी.
मुझे लगता यह सब दूसरे लोकों से पुनः वापस आ गए, भारत देश में. तभी तो नित्य न जाने क्या -क्या पढ़ना पड़ता. अभी बदायूं का ही कांड ले लो. सभ्यता शर्मसार हो रही है,ऐसा पूरे विश्व में हो रहा है,कहीं -कहीं तो इससे भी बुरा हो रहा होगा.
मुझे लगता है -पुनः वापस ऋषिकाल में लौटना चाहिए,यज्ञ -जिसे आचार्य प्रवर श्री राम शर्मा ने पुनर्जीवित किया ,वह और तेजी से हर घर में फैलना चाहिए.यज्ञ कलुषित विचारों का अंत और तेज प्रदायक है. भारतीय सोच बहुत उत्कृष्ट है.चाणक्य ने भी अग्निभय से बचने के लिए यज्ञ में आहुति देने की बात कही है ,इसलिए प्रिय साथियों -यज्ञाग्नि पुनःप्रज्वलित करो. वातावरण में सद विचार पुनर्जीवित होंगे.
धर्माधिकारियों को बहुत बदलने की आवश्यकता है.आजकल तो मंदिरों में भी यज्ञ नहीं होते.
एक कानून बनाया जाये -कि देश के हर मंदिर का पुजारी सुबह १०८ आहुति अवश्य देगा .सम्पूर्ण मंत्र नहीं आते, तो भी कोई बात नही -श्रीरामजयरामजयजयराम कह कर ही आहुति दो. समाज अवश्य बदलेगा.
जय भारत माता. वन्देमातरम.



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shivendra Mohan Singh के द्वारा
May 31, 2014

“भारतीय सोच बहुत उत्कृष्ट है.चाणक्य ने भी अग्निभय से बचने के लिए यज्ञ में आहुति देने की बात कही है ,इसलिए प्रिय साथियों -यज्ञाग्नि पुनःप्रज्वलित करो.” अगर हम अपनी नैतिकता और मर्यादाओं को भूलेंगे तो पराभूत हो जाएंगे. अस्ताचल पर जाने से बचने के लिए सम्भलना होगा, समझना होगा, वापस जड़ों की ओर लौटना होगा. पुनः बहुत सुन्दर लेख दुबे जी . सादर

pkdubey के द्वारा
June 2, 2014

thanks sir.


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