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"कोउ नृप होइ हमैं तौ हानी"

Posted On: 6 May, 2014 social issues में

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रामचरितमानस में गोस्वामी जी ने दासी मंथरा की ओर से एक चौपाई लिखी- “कोउ नृप होइ हमैं का हानी ;चेरि छाड़ि अब होब की रानी”. मात्र एक रात्रि के समय अंतराल में सत्ता का पूरा तख्तापलट करवाने के लिए एक दासी ने यह कह दिया-हमें कोई लेना-देना नहीं, मैं तो दासी की दासी ही रहूंगी.रानी आप सोचो आप का क्या होगा. मुझे तो लगता है कहीं न कहीं उसके मन के किसी कोने में यह बात अवश्य होगी ,यदि भरत राजा बनेगें ,तो मेरी भी थोड़ी ज्यादा चलेगी.खैर यह तो सब गहन बातें हैं.आज की अपनी बात करते हैं -
इस देश में कानून बहुत हैं और सब कानून आम आदमी के जीवन में रूकावट लाने के लिए बनाये गए.और कुर्सी पर बैठा हुआ अधिकतर सरकारी बाबू,कानून का रक्षक या प्राइवेट मैनेजर उस कानून का फायदा उठाकर-लक्ष्मी संग्रह में लगा हुआ, शायद वह यह नहीं जानता कि-लक्ष्मी चंचला और विष्णुप्रिया है ,वह तुम्हे कब छोड़कर चली जाएगी ,इसका आभाष भी नहीं होने पायेगा.हो सकता इसके बाद में तुम्हे हवालात की हवा खानी पड़े या तुम्हारी संतान निकृष्ट बनकर दर -दर की ठोकरें खाती फिरें या तुम्हारें द्वारा संग्रहीत पूरे धन को रंगरेलियां करने में पानी की तरह बहा भी सकती है.क्योकि नियति,प्रकृति का संतुलन बनाने में पूर्णतः निपुण है.
अब कुछ कानून के उदाहरण देखते हैं -
१. मैं एक बार अपने मामा जी के साथ अपने क्षेत्र “तिर्वा” के थाने(पुलिस स्टेशन) में गया,वहां हमारे एक दूर के रिश्तेदार सर्विस करते थे,हम लोग उनसे मिलने गए.मामा जी रिश्तेदार से बात करने लगे.तब तक हमारी नज़र एक ग्रिल जैसा दरवाज़ा लगे हुए कमरे में गयी,उसमे एक लगभग ६०-६५ वर्ष का व्यक्ति बैठा हुआ था .मैं गरीब और दुखी व्यक्ति की आँखों में तब तक देखता हूँ ,जब तक उसके दिल में न उत्तर जाऊँ.मेरा पहनावा और चेहरा देखकर गरीब मुझे अपना समझता है , रईस और स्मार्ट मुझे धनहीन और बुद्धिहीन समझता है.फलतः वह बुजुर्ग बोले -न जाने यह लोग मुझे क्यों पकड़ लाये,कल शाम से यहाँ हूँ.खेत में पानी भी लगाना था.बहुत मुसीबत है बेटा.मैं सुनकर अपनी नज़र नीचे किये हुए आगे चला गया,अन्तः स्थल से एक बहुत उच्च परन्तु मौन प्रार्थना निकली -बाबा तुम छूट जाओ. इससे अधिक मैं कर भी क्या सकता था.
२. इस देश में हर काम के लिए एजेंट बन गए,गॉव की भाषा में जिन्हे दलाल कहा जाता है.दलाली करने वाले इंसान को समाज अच्छा नहीं समझता,पर समय की मांग इन दलालों को बढ़ाती ही जा रही है. जैसे कि -पैन कार्ड,राशन कार्ड ,ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना हो,ट्रैन टिकट लेना हो,रूम लेना हो ,पुलिस से “नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट” लेनी हो बिना दलाल के आप सफल नहीं हो सकते.इस दलाली के धंधे में सरकारी या प्राइवेट सब शामिल हैं.शेष……………………………………………..फिर कभी.अच्छी सरकार की प्रतीक्षा में ………सम्पूर्ण जन मानस की ओर से आप का -pkdubey

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